आईबीपीएस पीओ परीक्षा की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के लिए पिछले वर्षों की कट-ऑफ (Cut-Off Marks) का विश्लेषण करना एक सटीक लक्ष्य निर्धारित करने में मदद करता है। कट-ऑफ अंक कुल रिक्तियों, परीक्षा के कठिनाई स्तर और परीक्षा में उपस्थित उम्मीदवारों की संख्या के आधार पर तय किए जाते हैं। यहां प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा की श्रेणीवार कट-ऑफ का विस्तृत विश्लेषण दिया गया है।
📌 आईबीपीएस पीओ कट-ऑफ: दोहरे स्तर का नियम
- अनुभागीय कट-ऑफ (Sectional Cut-Off): उम्मीदवार को प्रत्येक विषय (अंग्रेजी, क्वांट, रीजनिंग) में न्यूनतम अंक प्राप्त करने होते हैं।
- समग्र कट-ऑफ (Overall Cut-Off): तीनों विषयों के कुल अंकों के आधार पर मेरिट तय होती है। दोनों कट-ऑफ पास करना अनिवार्य है।
1. आईबीपीएस पीओ प्रीलिम्स कट-ऑफ (100 अंकों में से)
| श्रेणी (Category) | प्रीलिम्स अपेक्षित कट-ऑफ | सुरक्षित स्कोर (Safe Score) |
|---|---|---|
| सामान्य वर्ग (General / UR) | 52.50 – 56.50 | 60+ |
| अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) | 52.00 – 55.00 | 58+ |
| आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) | 51.00 – 54.00 | 58+ |
| अनुसूचित जाति (SC) | 46.00 – 49.50 | 52+ |
| अनुसूचित जनजाति (ST) | 40.00 – 44.00 | 48+ |
2. कट-ऑफ को प्रभावित करने वाले मुख्य कारक
- कुल रिक्तियों की संख्या: अधिक रिक्तियां होने पर कट-ऑफ में नरमी देखी जाती है, जबकि कम रिक्तियों में प्रतिस्पर्धा तीव्र हो जाती है।
- प्रश्नपत्र का कठिनाई स्तर: यदि परीक्षा में डीआई या पजल्स कठिन आते हैं, तो समग्र कट-ऑफ कम होती है।
- सटीकता (Accuracy): 0.25 नेगेटिव मार्किंग के कारण केवल सटीक उत्तर देने वाले अभ्यर्थी ही मेरिट में स्थान प्राप्त करते हैं।

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